Anand Tiwari Puranik's blog

तलाशती है राहें

गजल A Ghazal By Anand Tiwari Pauranik

तलाशती है राहें, यदि संभावनाएँ ।
शुभकामनाओं के दिये, हम क्यों न जलाएँ ॥
भूलकर अंधियारों के सारे सितम ।
अवरोध पथ के हम हटाएँ ॥
क्या हुआ यदि नीड़ का बिखरा हो तिनका ।
नए सपनों का घर फिर हम सजाएँ ॥  read more »

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