Anand Bilthare's blog

चार दिन की खुशियां

मुक्तक हिन्‍दी

चार दिन की खुशियां
जिन्दगी भर का गम
उजाला चार पल का
जिन्दगी भर का तम
अखियां कभी छलकाये आंसू
कभी छलकाये मोती
मुस्कुराहट चार पल की
जिन्दगी भर को नम ।

- आनन्द बिल्थरे
Hindi Kavita Hindi Muktak By Anand Bilthare

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