गजल A Ghazal By Anand Tiwari Pauranik
तलाशती है राहें, यदि संभावनाएँ ।
शुभकामनाओं के दिये, हम क्यों न जलाएँ ॥
भूलकर अंधियारों के सारे सितम ।
अवरोध पथ के हम हटाएँ ॥
क्या हुआ यदि नीड़ का बिखरा हो तिनका ।
नए सपनों का घर फिर हम सजाएँ ॥
क्रूर नभ पाषाण मन होगा द्रवित ।
यदि असरकारी हों अपनी दुआएँ ॥
इबारत रोशनी की पढ़ते चलें ।
खिड़कियों की कुण्डियाँ हम खोल पाएँ ॥
इक जरुरी मशविरा मान लें ।
इस ना-नुकुर से अक्सर बाज आएँ ।
जिन्दगी बहती नदी का नाम है ।
गीत लहरों के साथ गाएँ ॥
आनन्द तिवारी पौराणिक
श्रीराम टाकीज मार्ग महासमुंद (छ.ग.)
Hindi Ghazal | Ghazal
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