तेरी आँखों मे आज कल कोइ नया नूर
रहता है,
ना जाने किस फ़िराक मे तेरा दिल
रहता है,
प्यार जब हुआ तब हम दोनो के दिल
एक थे,
बेवफ़ाई कोइ करे और देखो कौन
सहता है, read more »
गजल A Ghazal By Anand Tiwari Pauranik
तलाशती है राहें, यदि संभावनाएँ ।
शुभकामनाओं के दिये, हम क्यों न जलाएँ ॥
भूलकर अंधियारों के सारे सितम ।
अवरोध पथ के हम हटाएँ ॥
क्या हुआ यदि नीड़ का बिखरा हो तिनका ।
नए सपनों का घर फिर हम सजाएँ ॥ read more »
मुक्तक हिन्दी
चार दिन की खुशियां
जिन्दगी भर का गम
उजाला चार पल का
जिन्दगी भर का तम
अखियां कभी छलकाये आंसू
कभी छलकाये मोती
मुस्कुराहट चार पल की
जिन्दगी भर को नम ।
- आनन्द बिल्थरे
Hindi Kavita Hindi Muktak By Anand Bilthare
लकडबग्घा, आरीफ और वहां घोडे नहीं थे
ढेर से
आर्ध्दत नहीं रहे ।
आराजी नहीं हैं ।
पर आरीफ था ।
आर्नर्तक ।
बिना अवतंश
बिना गोश के ।
कि लकडबग्घा ले भागा था,
आलय में निद्रामग्न ।
आलिंद था
अब्बा थे
अम्मी थी
आपा एक और दो
बेवा खाला ।
आद्र हवा में
आलजाल
इकसर
तैरती
श्रृंखलाए
खुलगिल ।
पर आरीफ था
कुअंक । read more »
युगों-युगों से गौमाता
हमें आश्रय देते हुए
हमारा लालन-पालन
करती आ रही है
हमारी जन्मदात्री माँ तो
हमें कुछ ही बरस तक
दूध पिला सकी
परन्तु यह पयस्विनी तो
जन्म से अब तक
हमें पय-पान कराती रही
हमारी इस नश्वर काया
की पुष्टता के पीछे है
उसके चारों थन
जिस बलवान शरीर
पर हमें होता अभिमान
वह विकसित होता read more »
भारत वर्ष की धरती पर, प्रभु ने षष्ठम् अवतार लिया |
भक्तों की रक्षा करने को, भगवान ने फरसा थाम लिया ||
त्रेता युग में थे तुम जन्मे, भृगु के पौत्र कहाये थे |
जमदग्नि-रेणुका के तुम जाये, ऋषि-कुल में तुम आये थे ||
प्रसेनजित के पुण्य थे पाए, साक्षात् शिव से फरसा पाया,
कामधेनु का दुग्ध पिया था, माँ के आँचल की थी छाया | read more »
नैनन में है जल भरा, आँचल में आशीष |
तुम सा दूजा नहि यहाँ , तुम्हें नवायें शीश ||
कंटक सा संसार है, कहीं न टिकता पांव |
अपनापन मिलता नहीं , माँ के सिवा न ठांव ||
रहीं लहू से सींचती, काया तेरी देन |
संस्कार सारे दिए, अदभुद तेरा प्रेम ||
रातों को भी जागकर, हमें लिया है पाल |
ऋण तेरा कैसे चुके, सोंचे तेरे लाल || read more »
राम नवमी के पावन पर्व पर अनुपम भेंट |
"लघु रामायण"
मनवा मेरा कब से प्यासा, दर्शन दे दो राम,
तेरे चरणों में हैं बसते जग के सारे धाम..............
जय-जय राम सीताराम, जय-जय राम सीताराम.........२
अयोध्या नगरी में तुम जन्मे , दशरथ पुत्र कहाये,
विश्वामित्र थे गुरु तुम्हारे, कौशल्या के जाये, read more »
सरगमीं प्यास को अपनी मैं बुझा लूँ तो चलूँ ,
तुम को दिल में आहिस्ता से सजा लूँ तो चलूँ ......२
भीनी यादों को यूँ संजोया है ,
बीज जन्नत का मैंने बोया है,
मन मेरा बस रहा इन गीतों में ,
ख़ुद को आईना, मैं दिखा लूँ तो चलूँ ||
सरगमीं प्यास को अपनी मैं बुझा लूँ तो चलूँ ........2
दिल की आवाज़ यूँ सहेजी है , read more »
तेरे दीदार को तरसे हैं हम .......
सूरत तो दिखाने आ जा.......|
कैसे मिलते तुझसे........
रंगों के बहाने आ जा .......
रंग प्यार के हम सब घोलें........
अपनेपन के हों गुब्बारें ......|
इन रंगों की तेज धार से........
बह जांय नफरत की दीवारें .....||
ऐसे रंगना हमें........
दुश्मन पे प्यार आ जाए.......|
भूलकर शिकवे सारे. ...... read more »
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